रिसर्च: प्रेगनेंसी में तनाव का होता है बच्चे के दिमागी विकास पर बुरा असर

यह रिसर्च इस बात का इशारा करता है कि एंग्जायटी और दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ाने वाले हार्मोन्स का शिशुओं के मानसिक विकास से सीधा संबंध है।

Stress in Pregnancy: प्रेगनेंसी में महिलाओं को तनाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि, इससे उनकी मानसिक और शारीरिक हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही साथ स्ट्रेस से पेट में पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है। इस बात की पुष्टि की गयी हाल ही में सामने आए एक रिसर्च पेपर में। जर्नल ईलाइफ (eLife) में छपे इस रिसर्च पेपर के अनुसार शिशुओं के दिमाग का विकास और गर्भावस्था में मां को होनेवाले तनाव के बीच गहरा संबंध हैं।

यह रिसर्च इस बात का इशारा करता है कि एंग्जायटी और दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ाने वाले हार्मोन्स का शिशुओं के मानसिक विकास से सीधा संबंध है। इस रिसर्च के लेखकों का कहना है कि, “इस रिसर्च के परिणामों के आधार पर यह समझा जा सकता है कि गर्भधारण से पहले और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को मानसिक और शारीरिक स्तर पर अधिक सपोर्ट की ज़रूरत है। ताकि, मां और बच्चे स्वस्थ जीवन जी सकें।”

प्रेगनेंसी में तनाव से बाधित होता है बच्चे का दिमागी विकास

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी महिलाएं जो प्रेगनेंसी के दौरान तनाव महसूस करे या अगर उनकी तबियत ठीक ना लगे तो घर के लोगों और कंसल्टेंट्स को उनका अधिक ध्यान रखना चाहिए। इस तरीके से प्रेगनेंसी के दौरान होनेवाली अन्य तकलीफों को भी आसानी से हैंडल किया जा सकता है।

गर्भवती महिला में तनाव से होनेवाले बच्चे की भविष्य में व्यावहारिक और भावनाओं को संभालने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि, इस तरह की रिसर्च का पैमाना कुछ चुंनिदा सवालों और उनके जवाबों के आधार पर तय किया जाता है। इसीलिए, हमेशा इस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता है। इस नयी स्टडी में पहली बार वैज्ञानिकों ने व्यवहार को पैमाना बनाया है।

बच्चे का भावनात्मक विकास और सामाजिक व्यवहार होता है प्रभावित

इस स्टडी में 78 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया और 3 महीनों तक इन महिलाओं में तनाव के लेवल की जांच की। तनाव की वजह से महिलाओं के शरीर में कॉर्टिसोल लेवल बढ़ जाता है। इस हार्मोंन्स के बढ़ स्तर का असर बच्चे के दिमागी विकास पर होता है। (Stress in Pregnancy and Baby’s Brain Development)

दरअसल, कॉर्टिसोल (Cortisol) बच्चे के व्यवहार में तनाव बर्दास्त करने की क्षमता को प्रभावित करता है। इसके साथ ही कॉर्टिसोल भ्रूण के विकास (foetal growth) को भी प्रभावित करता है। रिसर्च टीम के अनुसार कॉर्टिसोल की वजह से भविष्य में बच्चे के भावनात्मक विकास और सामाजिक व्यवहार पर भी असर पड़ता है।

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